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आयु वर्ग: 6–10 वर्ष
सीख: ईमानदारी हमेशा सम्मान दिलाती है।

बच्चों की कहानियाँ (हिंदी)

बच्चों के लिए प्रेम, सत्य, हिम्मत और अच्छे व्यवहार पर आधारित छोटी लेकिन असरदार कहानियाँ। हर कहानी एक आसान-सा संदेश देकर मन को उजाला करती है।

रंगों वाला बाग़

1

मीना को वह बाग़ संयोग से मिला। दादी के घर के पास एक पुरानी पत्थर की दीवार थी, जिस पर बेलें ऐसे लटकती थीं जैसे हरे पर्दे। मीना ने जब बेलें हटाईं, तो ठंडी हवा ने उसके गाल छूए—जैसे बाग़ बरसों से उसका इंतज़ार कर रहा हो।

अंदर कदम रखते ही उसे लगा जैसे हर पत्ता किसी मधुर गीत का हिस्सा है। लाल फूल झुककर नमस्ते करते, पीले फूल हँसते, और पेड़ों की पत्तियाँ सरसराकर बातें करतीं। मीना ने धीमे से पूछा, “क्या तुम सच में बोलते हो?”

एक फूल ने कहा, “हम उन्हीं बच्चों से बात करते हैं जो दिल से सुनते हैं।” मीना ने उत्सुक होकर पूछा, “तुम इतने रंगीन क्यों हो?” फूल मुस्कराया, “क्योंकि भावनाएँ रंगों को चमकाती हैं।”

मीना को याद आया कि उसने भाई से माफ़ी माँगी थी, माँ की मदद की थी—बाग़ और भी चमक उठा। फिर उसे याद आया कि उसने एक बच्चे के पुराने जूतों पर हँसी उड़ाई थी। उसी क्षण बाग़ का एक कोना फीका पड़ गया।

मीना घबरा गई: “क्या मैं इसे ठीक कर सकती हूँ?” पेड़ ने कहा, “गलती अंत नहीं—मौका है।” अगले दिन मीना ने उस बच्चे से माफ़ी माँगी और मदद की। जब वह लौटी, तो बाग़ का फीका कोना पहले से भी अधिक उजला हो गया।

मीना समझ गई: यह बाग़ उसके दिल की तस्वीर है। तब से वह बाग़ में सिर्फ़ देखने नहीं, बेहतर बनने आती।

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बारिश बाँटने वाला बादल

2

आसमान में एक छोटा-सा बादल रहता था—नाम था “पफ”। वह बहुत शर्मीला था। बड़े बादल जब बारिश करते, तो पफ दूर हट जाता। वह सोचता, “अगर मैं बरसा, तो कहीं किसी का दिन खराब न हो जाए!”

एक दिन वह सूखे खेत के ऊपर से गुज़रा। मिट्टी फटी हुई थी और किसान आसमान की ओर उम्मीद से देख रहा था। पास ही एक तालाब सिकुड़कर कीचड़ बन गया था; एक हिरन प्यासा-सा पानी खोज रहा था।

पफ के भीतर कुछ पिघल गया। वह बड़े बादलों के पास गया: “क्या मैं भी कोशिश कर सकता हूँ?” बड़े बादल ने कहा, “ज़रूरत के वक्त बारिश दुआ बन जाती है—धीरे शुरू करो।”

पफ ने कुछ बूँदें गिराईं। नीचे एक बच्ची ने ठंडक महसूस की और हँसकर बोली, “अम्मा! आसमान मुस्कुरा रहा है!” पफ हैरान रह गया—वह किसी का दिन खराब नहीं कर रहा था, वह मदद कर रहा था।

उसने नरम-नरम बारिश की। खेत की मिट्टी भीग गई, तालाब भरने लगा, पत्ते खुशी से थिरक उठे। बारिश थमी तो इंद्रधनुष निकल आया।

पफ ने सीखा: जब नीयत साफ़ हो, तो छोटी-सी कोशिश भी बड़ी खुशियाँ बना देती है।

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बहादुर छोटी लालटेन

3

एक गाँव था जहाँ रातें बहुत अंधेरी होती थीं। एक दुकान के बाहर एक छोटी लालटेन टँगी रहती थी—उसका नाम था “नूर”। उसकी रोशनी हल्की थी, इसलिए बड़ी लालटेनें उसे चिढ़ातीं: “तुम्हारी रोशनी तो रास्ते तक नहीं पहुँचती!”

नूर बुरा मानता, फिर भी हर रात जलता—क्योंकि वही उसका काम था। एक रात भयंकर तूफ़ान आया। हवा तेज़ चली, बारिश बरसी, बड़ी लालटेनें बुझ गईं, किसी का काँच टूट गया।

इसी अंधेरे में एक बच्चे की आवाज़ आई: “मदद! मैं रास्ता भूल गया!” नूर ने देखा—एक छोटा लड़का भीगा-सा खड़ा है, पत्थर फिसल रहे हैं।

नूर की लौ काँपी, पर बुझी नहीं। उसने खुद को हवा से बचाया और जमीन पर रोशनी का एक छोटा-सा गोला बना दिया। लड़के ने वह रोशनी देखी और उसी के सहारे दुकान तक पहुँच गया।

लड़के ने कहा, “तुमने मुझे बचा लिया!” नूर समझ गया: बहादुरी बड़ी रोशनी नहीं—मुश्किल वक्त में जलते रहना है।

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हार न मानने वाली पेंसिल

4

क्लास के पेंसिल बॉक्स में एक छोटी-सी पेंसिल थी—नाम था “टिप”। उसे चित्र बनाना पसंद था: सितारे, किले, जानवर और मुस्कुराते चेहरे। लेकिन उसकी नोक जल्दी टूट जाती।

कभी कोई बच्चा ज़ोर से दबाता तो “चटक!”—नोक टूट जाती। दूसरी पेंसिलें हँसतीं: “तुम कमज़ोर हो!” टिप उदास हो जाती।

एक दिन टीचर ने कहा, “ऐसा पोस्टर बनाओ जो दुनिया को बेहतर बनाए।” शांत-सी बच्ची सारा ने टिप को उठाया: “तुम ही काफी हो।”

सारा ने बच्चों को पेड़ लगाते, सफाई करते और बड़ों की मदद करते दिखाया। टिप खुश हुई। फिर हाथ थोड़ा तेज़ पड़ा—“चटक!” नोक टूट गई। टिप को लगा अब उसे फेंक देंगे, लेकिन सारा मुस्कराई: “कोई बात नहीं—हम फिर कोशिश करेंगे।”

सारा ने टिप को प्यार से शार्प किया और फिर काम शुरू किया। कई बार नोक टूटी, पर सारा ने हार नहीं मानी। पोस्टर पूरा हुआ और सारा जीत गई।

टिप छोटी हो गई थी, पर गर्व से भर गई: टूटना हार नहीं—हार मानना हार है।

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ईमानदार नन्ही चिड़िया

5

बाज़ार के पास एक नन्ही चिड़िया रहती थी—“चिको”। उसे चमकती चीज़ें पसंद थीं: बटन, सिक्के, मोती। एक दिन उसे जमीन पर एक सुनहरी बालियाँ मिलीं, जो धूप की किरण की तरह चमक रही थीं।

चिको ने सोचा, “यह मेरे घोंसले में कितनी सुंदर लगेगी!” वह उड़ने ही वाली थी कि उसने एक महिला को घबराया हुआ देखा: “मेरी बालियाँ… कहीं गिर गई है…”

चिको की उड़ान धीमी पड़ गई। उसे माँ की बात याद आई: “सच का उजाला सोने से भी तेज़ होता है।” उसने नीचे उतरकर वह बालियाँ महिला के दुपट्टे पर रख दी।

महिला खुशी से बोली: “मिल गई!” दुकानदार ने तालियाँ बजाईं, बच्चे मुस्कुरा दिए, किसी ने चिको के लिए दाने डाल दिए।

लेकिन चिको के लिए सबसे बड़ा इनाम वह सुकून था जो उसके दिल में उतर आया। उस रात उसने घोंसले में एक सफेद पंख रखा और कहा, “यह मेरी ईमानदारी की निशानी है।”

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बच्चों की लघु कहानियाँ (हिंदी)

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आयु वर्ग: 6–10 वर्ष
सीख: ईमानदारी हमेशा सम्मान दिलाती है।

बच्चों की कहानियाँ (हिंदी)

बच्चों के लिए प्रेम, सत्य, हिम्मत और अच्छे व्यवहार पर आधारित छोटी लेकिन असरदार कहानियाँ। हर कहानी एक आसान-सा संदेश देकर मन को उजाला करती है।

रंगों वाला बाग़

1

मीना को वह बाग़ संयोग से मिला। दादी के घर के पास एक पुरानी पत्थर की दीवार थी, जिस पर बेलें ऐसे लटकती थीं जैसे हरे पर्दे। मीना ने जब बेलें हटाईं, तो ठंडी हवा ने उसके गाल छूए—जैसे बाग़ बरसों से उसका इंतज़ार कर रहा हो।

अंदर कदम रखते ही उसे लगा जैसे हर पत्ता किसी मधुर गीत का हिस्सा है। लाल फूल झुककर नमस्ते करते, पीले फूल हँसते, और पेड़ों की पत्तियाँ सरसराकर बातें करतीं। मीना ने धीमे से पूछा, “क्या तुम सच में बोलते हो?”

एक फूल ने कहा, “हम उन्हीं बच्चों से बात करते हैं जो दिल से सुनते हैं।” मीना ने उत्सुक होकर पूछा, “तुम इतने रंगीन क्यों हो?” फूल मुस्कराया, “क्योंकि भावनाएँ रंगों को चमकाती हैं।”

मीना को याद आया कि उसने भाई से माफ़ी माँगी थी, माँ की मदद की थी—बाग़ और भी चमक उठा। फिर उसे याद आया कि उसने एक बच्चे के पुराने जूतों पर हँसी उड़ाई थी। उसी क्षण बाग़ का एक कोना फीका पड़ गया।

मीना घबरा गई: “क्या मैं इसे ठीक कर सकती हूँ?” पेड़ ने कहा, “गलती अंत नहीं—मौका है।” अगले दिन मीना ने उस बच्चे से माफ़ी माँगी और मदद की। जब वह लौटी, तो बाग़ का फीका कोना पहले से भी अधिक उजला हो गया।

मीना समझ गई: यह बाग़ उसके दिल की तस्वीर है। तब से वह बाग़ में सिर्फ़ देखने नहीं, बेहतर बनने आती।

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बारिश बाँटने वाला बादल

2

आसमान में एक छोटा-सा बादल रहता था—नाम था “पफ”। वह बहुत शर्मीला था। बड़े बादल जब बारिश करते, तो पफ दूर हट जाता। वह सोचता, “अगर मैं बरसा, तो कहीं किसी का दिन खराब न हो जाए!”

एक दिन वह सूखे खेत के ऊपर से गुज़रा। मिट्टी फटी हुई थी और किसान आसमान की ओर उम्मीद से देख रहा था। पास ही एक तालाब सिकुड़कर कीचड़ बन गया था; एक हिरन प्यासा-सा पानी खोज रहा था।

पफ के भीतर कुछ पिघल गया। वह बड़े बादलों के पास गया: “क्या मैं भी कोशिश कर सकता हूँ?” बड़े बादल ने कहा, “ज़रूरत के वक्त बारिश दुआ बन जाती है—धीरे शुरू करो।”

पफ ने कुछ बूँदें गिराईं। नीचे एक बच्ची ने ठंडक महसूस की और हँसकर बोली, “अम्मा! आसमान मुस्कुरा रहा है!” पफ हैरान रह गया—वह किसी का दिन खराब नहीं कर रहा था, वह मदद कर रहा था।

उसने नरम-नरम बारिश की। खेत की मिट्टी भीग गई, तालाब भरने लगा, पत्ते खुशी से थिरक उठे। बारिश थमी तो इंद्रधनुष निकल आया।

पफ ने सीखा: जब नीयत साफ़ हो, तो छोटी-सी कोशिश भी बड़ी खुशियाँ बना देती है।

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बहादुर छोटी लालटेन

3

एक गाँव था जहाँ रातें बहुत अंधेरी होती थीं। एक दुकान के बाहर एक छोटी लालटेन टँगी रहती थी—उसका नाम था “नूर”। उसकी रोशनी हल्की थी, इसलिए बड़ी लालटेनें उसे चिढ़ातीं: “तुम्हारी रोशनी तो रास्ते तक नहीं पहुँचती!”

नूर बुरा मानता, फिर भी हर रात जलता—क्योंकि वही उसका काम था। एक रात भयंकर तूफ़ान आया। हवा तेज़ चली, बारिश बरसी, बड़ी लालटेनें बुझ गईं, किसी का काँच टूट गया।

इसी अंधेरे में एक बच्चे की आवाज़ आई: “मदद! मैं रास्ता भूल गया!” नूर ने देखा—एक छोटा लड़का भीगा-सा खड़ा है, पत्थर फिसल रहे हैं।

नूर की लौ काँपी, पर बुझी नहीं। उसने खुद को हवा से बचाया और जमीन पर रोशनी का एक छोटा-सा गोला बना दिया। लड़के ने वह रोशनी देखी और उसी के सहारे दुकान तक पहुँच गया।

लड़के ने कहा, “तुमने मुझे बचा लिया!” नूर समझ गया: बहादुरी बड़ी रोशनी नहीं—मुश्किल वक्त में जलते रहना है।

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हार न मानने वाली पेंसिल

4

क्लास के पेंसिल बॉक्स में एक छोटी-सी पेंसिल थी—नाम था “टिप”। उसे चित्र बनाना पसंद था: सितारे, किले, जानवर और मुस्कुराते चेहरे। लेकिन उसकी नोक जल्दी टूट जाती।

कभी कोई बच्चा ज़ोर से दबाता तो “चटक!”—नोक टूट जाती। दूसरी पेंसिलें हँसतीं: “तुम कमज़ोर हो!” टिप उदास हो जाती।

एक दिन टीचर ने कहा, “ऐसा पोस्टर बनाओ जो दुनिया को बेहतर बनाए।” शांत-सी बच्ची सारा ने टिप को उठाया: “तुम ही काफी हो।”

सारा ने बच्चों को पेड़ लगाते, सफाई करते और बड़ों की मदद करते दिखाया। टिप खुश हुई। फिर हाथ थोड़ा तेज़ पड़ा—“चटक!” नोक टूट गई। टिप को लगा अब उसे फेंक देंगे, लेकिन सारा मुस्कराई: “कोई बात नहीं—हम फिर कोशिश करेंगे।”

सारा ने टिप को प्यार से शार्प किया और फिर काम शुरू किया। कई बार नोक टूटी, पर सारा ने हार नहीं मानी। पोस्टर पूरा हुआ और सारा जीत गई।

टिप छोटी हो गई थी, पर गर्व से भर गई: टूटना हार नहीं—हार मानना हार है।

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ईमानदार नन्ही चिड़िया

5

बाज़ार के पास एक नन्ही चिड़िया रहती थी—“चिको”। उसे चमकती चीज़ें पसंद थीं: बटन, सिक्के, मोती। एक दिन उसे जमीन पर एक सुनहरी बालियाँ मिलीं, जो धूप की किरण की तरह चमक रही थीं।

चिको ने सोचा, “यह मेरे घोंसले में कितनी सुंदर लगेगी!” वह उड़ने ही वाली थी कि उसने एक महिला को घबराया हुआ देखा: “मेरी बालियाँ… कहीं गिर गई है…”

चिको की उड़ान धीमी पड़ गई। उसे माँ की बात याद आई: “सच का उजाला सोने से भी तेज़ होता है।” उसने नीचे उतरकर वह बालियाँ महिला के दुपट्टे पर रख दी।

महिला खुशी से बोली: “मिल गई!” दुकानदार ने तालियाँ बजाईं, बच्चे मुस्कुरा दिए, किसी ने चिको के लिए दाने डाल दिए।

लेकिन चिको के लिए सबसे बड़ा इनाम वह सुकून था जो उसके दिल में उतर आया। उस रात उसने घोंसले में एक सफेद पंख रखा और कहा, “यह मेरी ईमानदारी की निशानी है।”

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